21 Dec 2025, Sun

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रविवार (17 अगस्त 2025) को यूक्रेन युद्ध पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि युद्ध में सीजफायर तभी संभव है जब दोनों पक्ष गोलीबारी रोकने पर सहमत हों. हालांकि, रूस अब तक इसके लिए तैयार नहीं है. युद्धविराम तक पहुंचना ही मुश्किल नहीं है, बल्कि उसे बनाए रखना और भी जटिल है. यूक्रेन में चल रहे साढ़े तीन साल लंबे युद्ध के संदर्भ में यह चुनौती और गंभीर हो जाती है.

रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका का लक्ष्य केवल अस्थायी युद्धविराम नहीं है, बल्कि रूस और यूक्रेन के बीच ऐसा शांति समझौता है, जो भविष्य में भी युद्ध रोक सके. एनबीसी न्यूज़ से बातचीत में रुबियो ने भारत और पाकिस्तान को लेकर भी बयान दिया. उन्होंने कहा कि हम हर दिन पाकिस्तान और भारत के बीच क्या हो रहा है, उस पर नजर रखते हैं. इस तरह हम कंबोडिया और थाईलैंड जैसे क्षेत्रों पर भी निगरानी रखते हैं. उन्होंने आगे कहा कि युद्धविराम कभी भी जल्दी टूट सकता है, इसलिए अमेरिका का फोकस स्थायी समाधान पर है.

ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकता का ज़िक्र
फॉक्स बिजनेस को दिए एक अन्य इंटरव्यू में रुबियो ने भारत-पाकिस्तान संबंधों का ज़िक्र करते हुए कहा कि हम भाग्यशाली हैं कि हमारे पास ऐसा राष्ट्रपति है, जिसने शांति को अपनी प्राथमिकता बनाया है. हमने इसे कंबोडिया-थाईलैंड और भारत-पाकिस्तान में देखा है. हालांकि, ये पहली बार नहीं है , जब अमेरिका ने भारत-पाकिस्तान सीजफायर को लेकर दावा किया है. इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप लगातार इस तरह का दावा करते रहे हैं.

भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने हमेशा किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की बात से इनकार किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान साफ कहा था कि किसी भी देश ने भारत को ऑपरेशन रोकने के लिए नहीं कहा. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी स्पष्ट किया था कि पाकिस्तान के साथ हुए युद्धविराम समझौते में किसी तीसरे देश की भूमिका नहीं थी.

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